सलाम शेहादी
नेशनल सेंटर ऑफ़ मीटियोरोलॉजी द्वारा प्रबंधित, यूएई रिसर्च प्रोग्राम फ़ॉर रेन एन्हांसमेंट (UAEREP) ने आज अपने रिसर्च अनुदानों के छठे चक्र के लिए पुरस्कार पाने वालों घोषणा की। हर प्राप्तकर्ता को तीन सालों की अवधि में अधिकतम US$1.5 मिलियन की धनराशि का अनुदान मिलेगा, जिसके हिसाब से प्रति वर्ष अधिकतम US$5,50,000 का आवंटन किया जाएगा।
अनुदान के छठे चक्र में, इको साइंस वर्क्स, यूएसए में प्रमुख रडार मौसम-विज्ञानी और सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत, डॉ. डिक्सन माइकल को “डुअल-पोलराइज़ेशन रडार सिग्नेचर्स और AI की मदद से क्लाउड सीडिंग साइंस का उन्नयन” के लिए, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया में सहायक प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत, डॉ. लिंडा ज़ोऊ को “ग्लेसियोजेनिक क्लाउड सीडिंग मटेरियल्स का AI की मदद से विकास और ऑप्टिमाइज़ेशन” के लिए और होहेनहाईम यूनिवर्सिटी, जर्मनी में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत, डॉ. ओलिवर ब्रांच को “लैंड कवर और लैंड फ़ॉर्म में बदलाव के ज़रिए वर्षा में वृद्धि (RAINLAND)” के लिए पुरस्कार पाने वालों के रूप में चुना गया है।
वर्ल्ड मीटियोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइज़ेशन के प्रेसिडेंट और NCM के डायरेक्टर जनरल, महामहिम डॉ. अब्दुल्ला अल मंदूस ने कहा: “प्रेसिडेंशियल कोर्ट के वाइस प्रेसिडेंट, उपप्रधानमंत्री और चेयरमैन, महामहिम शेख मंसूर बिन ज़ाएद अल नाहयान के मार्गदर्शन में, वैज्ञानिक सहयोग और व्यावहारिक इनोवेशन के अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में UAEREP की स्थिति लगातार मज़बूत होती जा रही है। अपने ऐडवांस इन्फ़्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल विशेषज्ञता के ज़रिए, NCM रिसर्च को असल दुनिया पर सकारात्मक असर डालने वाले समाधानों में बदलने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह व्यावहारिक और सस्टेनेबल इनोवेशन में निवेश करने के यूएई के दृष्टिकोण को दर्शाता है।”
UAEREP की निदेशक और NCM के रिसर्च एंड वेदर एन्हांसमेंट डिपार्टमेंट की डायरेक्टर, आल्या अल मज़रुई ने कहा: “पुरस्कार पाने वालों के प्रस्ताव, वैज्ञानिक इनोवेशन और व्यावहारिक इस्तेमाल के ऊँचे मानकों को दर्शाते हैं। UAEREP के तकनीकी संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के ज़रिए, ये प्रोजेक्ट विज्ञान पर आधारित ऐसे समाधान प्रदान करेंगे, जो जल के संरक्षण और जलवायु को समस्याओं से उबारने में कारगर साबित होंगे।”
डॉ. डिक्सन माइकल का प्रोजेक्ट रिफ़्लेक्टिविटी पर आधारित स्टॉर्म ट्रैकिंग के परंपरागत तरीके के परे जाकर क्लाउड सीडिंग के प्रभावों के मूल्यांकन का बेहतर तरीका देता है। यह पारदर्शी, अनिश्चितता को समझकर काम करने वाले तरीकों का इस्तेमाल करके, माइक्रोफ़िज़िकल मार्गों को कैप्चर करने और प्रभावों का आकलन करने के लिए LROSE/TITAN को अपग्रेड करेगा और इन प्रणालियों को कायम रखने की NCM की क्षमता को मज़बूत करेगा।
प्रो. लिंडा ज़ोऊ का प्रोजेक्ट ऐडवांस्ड नैनोकॉम्पोज़िट आइस-न्यूक्लिएटिंग मटेरियल्स का विकास करेगा और उनकी परफ़ॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए AI-आधारित विश्लेषण का उपयोग करेगा। यह ऑप्टिमाइज़ेशन पोर्टेबल आइस न्यूक्लिएशन एक्सपेरिमेंट (PINE) क्लाउड चैंबर से मिले डेटा के आधार पर किया जाएगा, जिसे प्रोजेक्ट के अंतिम चरण में NCM में तैनात किया जाएगा।
डॉ. ओलिवर ब्रांच का RAINLAND प्रोजेक्ट यह दिखाने के लिए थ्योरी–ऑब्ज़र्वेशन–सिम्युलेशन का इस्तेमाल करेगा कि लैंड-कवर और लैंड-टोपोग्राफ़ी में बदलाव करके मॉइस्ट कन्वेक्शन को कैसे ट्रिगर किया जा सकता है। इस रिसर्च का उद्देश्य यूएई में वर्षा को बढ़ाने के लिए उचित लैंड-फ़ॉर्म डिज़ाइन और लोकेशन की पहचान करना है।
सलाम शेहादी