सुमी अलकेब्सी
संचार व मार्केटिंग निदेशक
ईमेल: salkebsi@dohadebates.com
इस लोकप्रिय डिबेट शो के दूसरे एपिसोड में यह सवाल उठाया गया : क्या हमने अपनी बनाई हुई दुनिया में अपना सौंदर्यबोध खो दिया है?
इस हफ़्ते, Qatar Foundation के Doha Debates ने अपने जाने-माने शो, Doha Debates में इस विषय पर रोशनी डाली कि आर्किटेक्चर किस तरह सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाता और आकार देता है। नए सीज़न के दूसरे एपिसोड में यह सवाल उठाया गया : क्या आधुनिक आर्किटेक्चर ने सौंदर्य और परंपरा को नई परिभाषा दी है या फिर उसके पतन का कारण बना है?
सूत्रधार दारीन अबूगैदा की मेज़बानी में होने वाले इस डिबेट शो में कतर की अलग-अलग जगहों के छात्रों और दुनिया भर के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें शामिल हैं : मरवा अल-सबूनी, सीरियाई आर्किटेक्ट और The Battle for Home की लेखिका, तारिक खय्यात, T.K. Architects के संस्थापक और Zaha Hadid Architects के भूतपूर्व निदेशक, कार्ल कॉर्सनेस, दार्शनिक और Sivilisasjonen पत्रिका के मुख्य संपादक और बिदिशा सिन्हा, Zaha Hadid Architects की सहायक निदेशक।
कॉर्सनेस और अल-सबूनी का तर्क है कि बीसवीं सदी के आधुनिक मापदंडों के चलते आर्किटेक्चर अपनी मूल भावना से भटक गया है। अब अमूर्तता और अलगाव ने सजावट, सामंजस्य और इंसानी पैमाने की जगह ले ली है। अल-सबूनी का यह अनुभव युद्ध के बाद सीरिया के होम्स शहर के पुनर्निर्माण पर आधारित है। आर्किटेक्चर सामाजिक एकजुटता को कैसे आकार देता है इस पर विचार करते हुए वे चेतावनी देती हैं, "हमने आर्किटेक्चर के जिस स्वरूप को अपनाया है उसमें सांस्कृतिक और बौद्धिक पतन की छाप नज़र आती है और आज हमें आर्किटेक्चर में जो सूनापन दिखाई देता है, वह इसी वजह से है।"
दूसरी ओर, सिन्हा आधुनिक आर्किटेक्चर की पैरवी करते हुए उसे कला का एक ऐसा विकसित होता हुआ रूप करार देती हैं, जो नए युग के लिए सौंदर्य को नए सिरे से परिभाषित करता है। वे कहती हैं, “आधुनिक आर्किटेक्चर अब सुंदरता से कम और विचारधारा से ज़्यादा प्रेरित है।"
इन दो विपरीत विचारों के बीच, खय्यात का मानना है कि परंपरा और इनोवेशन के बीच ताल-मेल बिठाना ज़रूरी है। वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि हमने अपना सौंदर्यबोध खो दिया है।” “हमारा खुद से और इस सच्चाई से संपर्क टूट गया है कि आर्किटेक्चर हमारी ज़िंदगी के अनुभव को बेहतर बनाने में किस तरह अहम भूमिका निभाता है।"
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ती जाती है, विशेषज्ञों और छात्रों में विरासत और प्रगति, स्थानीय पहचान और वैश्विक डिज़ाइन और सदाबहार सुंदरता बनाम सुंदरता के विकसित होते नए रूप को लेकर रस्साकशी होने लगती है। लेकिन यह बातचीत बार-बार एक ही मान्यता की तरफ़ लौट आती है : आर्किटेक्चर कभी तटस्थ नहीं होता। यह हमारे जीने के ढंग, हमारे आदर्शों और एक-दूसरे से जुड़ने की शैली को आकार देता है।
Doha Debates के प्रबंध निदेशक, अमजद अताल्लाह कहते हैं, “जो कुछ भी हमें दिखाई देता है, वह सौंदर्य नहीं है। सौंदर्य वह है, जिसे हम अहमियत देते हैं।” “इस बहस में हिस्सा ले रहे युवाओं के विचार हमें याद दिलाते हैं कि आर्किटेक्चर हमें अपनी मानवता की भावना से दूर ले जा सकता है या उसके करीब ला सकता है। उनके सवाल उठाने के साहस और आधुनिक जगत में सौंदर्य का नए सिरे से अर्थ तलाशने की उनकी कोशिश से हमें अलग-अलग पीढ़ियों के बीच इस तरह की स्वस्थ बहस के महत्त्व का पता चलता है।”
दोहा में इस लोकप्रिय प्रोग्राम की चर्चित मजलिस शैली में फ़िल्माया गया यह एपिसोड, मुक्त और सत्यान्वेषी चर्चा तथा अलग-अलग संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच सहानुभूति और समझ को बढ़ावा देने के प्रति Doha Debates के संकल्प को दर्शाता है।
DohaDebates.com और Doha Debates के YouTube चैनलपर पूरा एपिसोड देखें।
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सुमी अलकेब्सी
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